Aadarsh Rathore
वैसे मेरे पेइंग गेस्ट वाले भूत के विषय में नया खुलासा हुआ है। मैंने लिखा था कि मेरे मित्र ऑफिस से लौटे थे तो पंखा गिरा पड़ा था...। लेकिन उन्होंने वो ब्लॉग पढ़ने के बाद मुझे उस घटना के बारे में फिर से याद करने को कहा..। मुझे ध्यान हो आया कि वो पंखा उनकी मौजूदगी में ही गिरा था...। उनके बगल वाले कमरे में नया लड़का आया था... उसने इस पीजी में रहने वाले भूत के बारे में पूछा..। तो मेरे मित्र ने उसे डराने के मकसद से कहा कि उनके कमरे के पंखे से लटक कर ही लड़की ने जान दी थी..। लेकिन उन्हें नहीं मालूम था कि ये मज़ाक उन्हें महंगा पड़ने वाला था...। अगली सुबह जब उनकी नींद खुली तो नज़र छत पर गई... पंखा वहां से गायब था..। वो डर गए... उन्होंने अपने शरीर को चेक करना शुरु कर दिया कि कहीं कोई चोट न लगी हो...। उनके मन में ख्याल आया कि वो कहीं पंखे से कटकर मर न गए हों...। वो उठे और पंखे को ढूंढने लगे... फैन के पंख तुड़े-मुड़े से पड़े थे... और वो एक कोने पर पड़ा था..। बगल वाले बिस्तर के तकिए पर पड़े धूल के निशान गवाही दे रहे थे कि पंखा वहीं गिरा था..। ये अजब संयोग था कि उनका रूममेट किसी कारणवश उस रात पीजी में नहीं आ सका था..। इस घटना के बाद वो तुरंत उठे और स्नान आदि के बाद बगल वाले मंदिर में मत्था टेक आए...।

ये अजीब घटना थी.. पंखे के ठीक नीचे सो रहा शख्स बच गया..। संयोग से जहां पंखा गिरा, उस बेड पर सोने वाला शख्स भी वहां नहीं था..। इस घटना के बाद भूत का आतंक और बढ़ गया...। सभी कहने लगे कि मज़ाक महंगा पड़ गया... क्योंकि कथित रूप से लड़की ने खुदकुशी मेरे कमरे में की थी लेकिन मेरे मित्र उसे मज़ाक में अपने कमरे में बता रहे थे..। ऐसे मे शायद उस भूत ने अपनी उपस्थिती दर्ज कराने और सबक सिखाने के लिए ही ऐसा किया था...। इसके बाद एक दौर ऐसा भी आया कि पीजी के लड़कों ने भूत बनकर एक दूसरे को डराना शुरु कर दिया..। लेकिन उससे अलग भी ऐसी घटनाएं होने लगीं कि सभी सही रास्ते पर आ गए...।

चलिए इन दिनों की घटनाओं के बारे में भी खुलासा कर देता हूं..। रोज़ रात को मेरे कमरे से सिक्कों के गिरने की आवाज आती थी.. मैं लाइट जलाकर देखता था तो कुछ नहीं मिलता था..। लेकिन ये आवाज़ इतनी स्पष्ट होती कि इसे भ्रम का नाम देना सही नहीं था...। कई बार मेरे दूसरे मित्रों ने भी मेरे इस कमरे में इन अजीब आवाज़ों को सुना था..। मैंने कई बार चेक करने की कोशिश की लेकिन कहीं कुछ न होता था...। एक दिन मैंने जगकर मामला चेक करने की ठानी..। रूममेट सो रहा था... मैं लाइट ऑन करके कुछ पढ़ रहा था... तभी फिर आवाज़ आई... मुझे कुछ समझ में नहीं आया...। 20 मिनट बाद आवाज़ आई तो मैंने उसकी दिशा की ओर देखा..। देखकर मुझे बहुत हंसी आई...। दरअसल मेरे रूममेट पर इन दिनों हीरो बनने का भूत सवार है...। किसी ने उन्हें सुझाया कि इसके लिए 6 पैक एब्स होना ज़रूरी हैं..। इसलिए वो जिम जा रहे हैं और चने खा रहे हैं..। अब वो एक गिलास में रोज़ रात को चने भिगाने के लिए डालते हैं..। अब वो तो सो जाते हैं लेकिन भुतहा घटना को जन्म देने का मसाला तैयार कर जाते हैं...। जैसे-जैसी चने भीगने के बाद फूलते हैं.. गिलास भर जाता है..। चने एक-एक करके टेबल पर गिरना शुरु हो जाते है...। अब वो उछलकूद मचाते हुए लकड़ी के टेबल पर सिक्के के गिरने जैसा शोर पैदा करते हैं...। रात में तो वैसे भी गजब का सन्नाटा होता है...। इस तरह मैंने एक भूत को तो पकड़ लिया...।

मैंने सोचा कि बाकी आवाज़ें भी कुछ भ्रम ही हैं... या फिर कोई वैज्ञानिक कारण है..। लेकिन अभी कुछ सवाल अनसुलझे हैं..। उनमें मे से एक घटना ऐसी है जो परेशान करने वाली है...। सभी घटनाओं से इतर इस साल कुछ अजीब हो रहा है...। मेरे एक मित्र हैं, मेरे ही फ्लोर पर रहते हैं.. अक्सर उनके कपड़े चुरा लिये जाते हैं...। लेकिन 2 तीन महीने बाद उनके कमरे के बाहर अचानक गिरे मिलते हैं...। यही नहीं, एक बार उनका इनर गायब हो गया..। हमने सोचा कि कोई चुरा ले गया.. अब पीजी में इतनी तरह के लोग होते हैं, कोई चुराता भी होगा...। लेकिन अभी हाल ही में लोह़ड़ी के दिन हम लकड़ियां लाने के लिए छत पर गए...। लकड़ियों का एक पुराना ढेर जो सालों से वैसा ही पड़ा है...। हम उसमे से जलाने के लिए लकड़ियां निकाने लगे..। जैसे ही आधा ढेर खाली हुआ... अंदर से एक कपड़ा निकला..। ये उन्ही भाई साहब का इनर था...। हम सब चौंक गए..। बिल्ली या चूहा उसे दूसरे फ्लोर के कमरे से उठाकर दो मंजिल ऊपर छत पर ले जाए... ये समझ में नहीं आ रहा था..। फिर इतने नीचे...? सब हैरान थे..। फिर मैंने एक खास चीज़ नोटिस की.. उनके जितने भी (4) कपड़े इस तरह से गायब हुए, उन सभी का रंग नीला है..। मैंने नीले रंग के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला किया ये एक तंत्र संबंधी रंग है...।

पीजी के भुतहा होने के बारे में कहते हैं कि पहले आसपास सूनसान जंगल था.. कोई नहीं रहता था..। फिर एक बाबा आए जिन्होंने पीपल के पेड़ के नीचे डेरा लगाया...। इस वजह से ही लोग यहां बसना शुरु हुए थे..। आज उन बाबा (नेभराज साहिब) का मंदिर हमारे पीजी के पास ही है..। एक और बात.. हमारे पीजे के सामने आस्था कुञ्ज पार्क है..। निर्माणाधीन ये पार्क जंगल से कम नहीं..। इस पार्क मे उगे कीकर के पेड़ों की शाखाएं हमारे पीजी की बालकॉनी को छूती हैं..। और कीकर के बेढंगे पेड़ों पर फंसे लिफाफे और आसपास के लोगों का फेका सामाना भुतहा माहौल पैदा करता है..। यही नहीं, हमारा पीजी तिकोना है..। पहले ये आयताकार प्लॉट था लेकिन दो भाइयों के बीच एक कर्ण (Diagonally) के रूप में हुआ है.. एक कोने से दूसरे कोने तक..। यानि दो त्रिभुज के रूप में...। हमारा पीजी का मुख्य द्वार कस्बे की पिछली तरफ, जंगल की ओर है..। पश्चिम की तरफ द्वार है और वह पूर्व की ओर संकरा होता चला जाता है...। शायद इस तरह नकारात्मक ऊर्जा इस पीजी मे भरी रहती है...।

आप यकीन करें या न करें...बेशक आप इसे भ्रम करार दें.. लेकिन मेरे पीजी में आज भी भुतहा आवाज़ों का सिलसिला जारी है...। फिर आप सोच रहे होंगे कि मैं वहां रह क्यों रहा हूं..? इसका एक ही जवाब है, वहां पर जो कोई भी चीज़ है वो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती..। उसने आजतक किसी का अहित नहीं किया है.. और न ही किसी के काम में कोई बाधा पहुंचाई है..। सिर्फ उसके ऊपर लगातार चर्चा करते रहने से भय वाला माहौल ज़रूर बना रहता है..। कहते हैं वो मेरा ही कमरा है, और मेरे बिस्तर के ठीक ऊपर लगा पंखा है जिससे लटककर किसी लड़की ने आत्महत्या की थी, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट घटना ऐसी नहीं हुई जो साबित करती हो कि कोई भूत है..। जब तक आंखें कुछ स्पष्ट नहीं देख लेतीं... तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता..। वैसे भगवान करे कि वो दिन कभी न आए... लेकिन फिलहाल आप इसे भ्रम कह सकते हैं...। मैं भी यही मानकर खुद को दिलासा देता रहता हूं...

(सत्यघटनाओं पर आधारित इस सीरीज़ को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
12 Responses
  1. बहुत अच्छा लगता है आपका ब्लाग पढ़कर, लेकिन सर मेरी राय माने तो आप उस पीजी को छोड़ दों..


  2. अजी आज रात को वो लडकी जो पंखे से लटकी है नीचे आप के बिस्तर पर गिरेगी बिना पंखे के, बच कर रहे,


  3. भई.... मुझे तो लगता है कि भूत ही होगा....


  4. bhoot naam ke prani se saamna to mera bhi hua hai... par aaj tak faisla nahi kar paya ki wo mera waham hai ya sach...

    par aadarsh bhayi dilchasp ghatna hai... aapki PG mein ab to raat gujarne ki ikchha machalne lagi hai... dekhu to wo khubsurat bhutni hai kaun?... ;)


  5. भाई साहब मै तो यहीं कहुंगा कि भूत भूत जितना करोंगे उतना ही भूत दिखाई और सुनाई देगा, और जितना नहीं करोगे कुछ नहीं लगेगा क्योंकि दिमाग वहीं दिखात है जिसको हम ज्यादा तवज्जोर देतेहै


  6. Ramnaresh Says:

    अच्छा तो कहानी में twist हैं...पर यार ये बताओ तुमे वास्तु का भी ज्ञान हैं क्या.....दरअसल मुझे कुछ पूछना हैं इसलिए तुमसे ये प्रश्न कर रहा हूँ.

    घटना का अच्छा विवरण किया आपने....पढ़कर प्रसन्नता के साथ साथ डर भी लग गया.......कब तक डराओगे यार....


  7. aadarsh bhayi jara is par bhi gaur farmaiye...
    http://ab8oct.blogspot.com/2010/01/blog-post_20.html

    agar achha lage to humein v follow karein...


  8. rajiv Says:
    This comment has been removed by the author.

  9. rajiv Says:

    mere ek sathi ko bhi kuch ajeebogareeb ahsas hua.. To see this please click rajubindas.blogspot.com


  10. baljeet Says:

    adarsh bhaiya maine i-next news pepar me aapke blog ke bare me jana mai aapke blog se bahoot impress hu


  11. yeh sab aap logo ka bhram hai. pehle mujhe aadhi raat ko ek aurat ke chillane ke awaaz aati thi. khoj padtaal par paaya ki wo hamaare chaukidaar ki seeti ki awaaz thi:)
    wais bhi, agar koi bhoot aa bhi jaaye, tumse dar kar bhaag jayega...


  12. गज़ब की सीरीज़ है भाई!