मुस्कुराकर वो खुद को खुश जताते रहे
मगर अफसोस! आंसू सब सच बताते रहे...
सुना था कि इश्क़ में खो देते हैं लोग अहम् अपना
ये क्या किया जो तुम अपनी अहमियत ही गंवा बैठे...
"एक पल में ही तो अपना बनाया था यकायक
एक पल में ही बेगाना भी कर गए वो अचानक"
मेरे गांव की सूरत ही नहीं, गांववालों की सीरत भी बदली हुई नजर आती है
देख मेरे गांव की तरक्की ऐ दिल्ली! तू व्यर्थ ही अपने विकास पर इतराती है...