दो भक्तों की कथा / बलराम अग्रवाल
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"सर, आज की परिस्थिति में 'भक्त' और 'अंधभक्त' में क्या अन्तर है?"
"जो लोग एक खास खेमे का राग अलापते हैं, वे भक्त हैं और अपने खेमे से बाहर
वाले समस्त रागिय...
8 months ago


आप जहां है...
यही दस्तूर है वहां का...
ये उलझन है सोच और सच्चाई की धागों का...
बेशक... सोच से फतह होती है मंजिले...
और सच्चाई की भी है एक मंजिल...
जूझना काम है वीरों का...
और कोसना ही कर्म है अभागों का...
खाओ-पीयो
घूमो-पीयो
मस्त रहो,
सारी उलझनें खत्म।
Be positive!