आज हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले और आसपास
के इलाकों में 'सैर' मनाई
जा रही है। यह त्योहार हर साल सितंबर महीने में मनाया जाता है। इस दिन सुबह-सुबह ताजा
फसल के आटे से रोट बनाए जाते हैं,
साथ ही देवताओं को नई फसलों और फलों वगैरह का भोग लगाया जाता है।
पहले इस दिन अखरोट (walnut)
से निशाना लगाने वाला खेल भी खेला करते थे। शायद आज कुछ गांवों
में यह परंपरा बची हुई हो। इसी दिन रक्षाबंधन के दिन पहनी गई राखी को भी उतारा जाता
है।
इस त्योहार को मनाए जाने की भी अपनी वजह है। देखा जाए तो यह बरसात का आखिरी दौर है। कई साल पहले भारी बारिश की वजह से लोगों को तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता था। बरसात में कई संक्रामक बीमारियां फैल जाया करती थीं, जिससे कई लोगों को इलाज न मिल पाने की वजह से अपनी जान गंवानी पड़ती थी। कई बार भारी बारिश, बाढ़, बिजलनी गिरने से भी तबाही होती थी। न सिर्फ जान-मान का भारी नुकसान होता था, बल्कि फसलें भी तबाह हो जाया करती थीं।

तो इस बार भी बरसात ईश्वर की कृपा से अच्छे
बरसात निकल गई। इसलिए ईश्वर का शुक्रिया,
आपको भी सैर मुबारक हो। आने वाला साल आपके लिए संपन्नता और अच्छा
स्वास्थ्य लाए। खुद जानिए,
और Share
करके दूसरों को भी बताइए कि क्यों मनाई जाती है सैर।
नोट: यही ऑरिजनल पोस्ट है, जिसे
सबसे पहले जोगिंदर नगर कम्यूनिटी पेज पर शेयर किया गया था। बाद में वहीं से कुछ साइट्स
और पेजों ने बिना क्रेडिट दिए चुराया है। अगर यह जानकारी आपको शेयर करनी है तो बेझिझक
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