Aadarsh Rathore
सप्ताह भर पहले मैं अपना पेन गुम होने से बेहद दुखी था। उस वक्त मैंने प्रण लिया था कि मैं ऑफिस में कभी भी पेन नहीं ले जाउंगा। दो दिन तक तो मैं अपने प्रण पर कायम रहा लेकिन फिर ऑफिस में काम करने के लिए दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ रहा था। ऐसे हालात में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। पेन चोरी होने वाली पोस्ट पर कई लोगों की सलाह आई थी। उनमें से एक मित्र ने कहा था कि मैं पेंसिल इस्तेमाल किया करूं। मैंने सोचा कि क्यों न इसे भी आजमा कर देख लिया जाए। मैंने एक अपने मित्र से कहा कि भाई पेइंग गेस्ट आते वक्त पेंसिल ले आना। मित्र ने स्टेशनरी की दुकान पर गया तो हाईटेक पेंसिल ले आया जिसमें ग्रेफाइड की बारीक छड़ें अलग से पड़ती हैं। मैंने उससे कहा कि भाई साधारण पेंसिल लानी थी... तो वो बोला कि मैंने सोचा कि बेहतर वाली ही ले चलूं..। काम आती रहेगी। लेकिन फिर भी मैंने सोचा कि चलो ठीक है, पेंसिल को भला कौन उड़ाएगा अब...।


तीन दिन तो सब ठीक चला..। आज मैंने फिर गलती कर दी..। उस पेंसिल को अपने डेस्क पर छोड़कर मिनट भर के लिए मुझे पीसीआर तक जाना पड़ा। वापस आकर मैंने उस जगह के लिए हाथ बढ़ाया जहां पेंसिल छोड़ी थी.. नज़रें मॉनिटर पर थीं और हाथ पेंसिल को टटोल रहे थे...। कुछ देर तक जब हाथ में कुछ नहीं आया तो मैंने काग़ज़ों को उलट-पलटकर देखा..। कहीं कुछ न था... मैंने नज़र इधर-उधर दौड़ाई...और लोगों के हाथों और जेबों को स्कैन करने लगा...। कहीं कुछ नज़र नहीं आया..। इस बार मैंने पूछताछ भी नहीं की..। मैं समझ गया था कि अब वो पेंसिल भी 'गोल' हो गई है..। मेरी पॉकेट में अब भी उस पेंसिल के रिफिल पड़े हुए हैं..। मन कर रहा है कि इन्हें भी छोड़ दूं डेस्क पर... कम से कम वो व्यक्ति इसका सदुपयोग तो कर पाएगा जिसने वो पेंसिल उड़ाई है...। आज दुखी नहीं हूं, गुस्सा हूं खुद पर..।

ऐसे में मेरे मन में एक विचार आया है...। हर कंपनी को अपने कर्मचारियों के लिए दिशा निर्देश तय करना चाहिए कि वो बिना पेन के ऑफिस में न आएं। जिस तरह बिना आईकार्ड आने व्यक्ति को प्रवेश नहीं मिलता उसी तरह बिना पेन आने वाले व्यक्ति को भी प्रवेश की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए..। या फिर जुर्माना लगना चाहिए...। इसके साथ ही यूं ही कहीं मिले पेनों को निश्चित जगह पर जमा करने की आदत डालनी चाहिए। रिसेप्शन इसके लिए सबसे सही जगह है...। इसी जगह पर दिन खत्म होने पर लोग पाये गए पेन जमा कराएं और जिनके पेन खोए हैं वो वहां अपना चेक कर लें। लेकिन ये प्रक्रिया सिर्फ ईमानदार लोगों के लिए है। चोरों का क्या किया जाए? मेरा बस चले तो मैं तो पेन गायब होने पर सीसीटीवी फुटेज देखूं और जिसने भी पेन उठाया हो उसे सरेआम बेइज्जत करूं। और शायद यही एक तरीका है इन पेन चोरों से निजात पाने का...।
8 Responses
  1. मुझे लगने लगा कि आप इतना बेहतरीन लिखते हो इससे परेशान होकर कोई आपका लेखन छुड़वाने की साजिश कर रहा है. अब की बोर्ड बचाना...वो ही एक सहारा बचा है. पक्का अगली नजर उसी पर होगी उस साजिशकार की.


    कोई बाहरी ताकत तो साजिश में नहीं लगी है कहीं??


  2. kavita verma Says:

    aapki vyatha samajh sakati hu,us pal aisa lagata hai jaise aapke hhath pair baandh kar paani mein tairane ke liye chhod diya ho.


  3. हमें तो इसमें विदेशी ताकतों का हाथ लगता है। इसकी जाँच होनी चाहिये।


  4. librahaan ayog ka karyakaal samapt ho chuka hai kyo na usi se janch kari jaye..


  5. हाहाहहाहाहाहाहा


  6. kshitij Says:

    waise company walon ko apne staff ke office mein likhne ke liye pen-pencil ka intezam to karna hi chahiye...waise pen-pencil ki chori takriban har daftar ki kahani hai......bhai


  7. जोगी Says:

    :) ...bilkul sahi yaar...exactly yahi hota hai :)


  8. Neha Pathak Says:

    mujhe to laga tha ye pen-pencil khona school tak hi seemit rehta hai...lagta hai ye aajeevan bane rehne waali samasya hai :)