राहुल गोयल
अक्सर हमें ऐसी खबरें पढ़ने को मिलती हैं कि कहीं कोई हादसा हुआ और घायलों को समय पर इलाज न मिलने से उनकी जान चली गई। घायल सड़कों पर तड़पते रहते हैं और तमाशवीन उनकी मौत का इंतज़ार करते हुए तरस खाते रहते हैं। लेकिन भीड़ में से कम ही लोग ऐसे होते हैं जो उनकी मदद के लिए आगे आते हों। शायद हम-आप भी ऐसे मौकों खुद से कोई बहाना करके भागे हों। संवेदनहीन होती दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मानवता के लिए मिसाल हैं। ऐसे लोग जो बिना किसी स्वार्थ के ऐसे लोगों की मदद के लिए आगे आते हैं जो सड़क पर निष्ठुर दुनिया के सामने तड़पते हुए अपनी मौत का इंतज़ार कर रहे होते हैं।

एक सड़क हादसे मे दोस्त की मौत ने कुछ युवाओं को इस कदर झकझोरा कि उनकी जिंदगी ही बदल गई। इन सच्चे दोस्तों ने ऐसे लोगों की जिंदगी बचाने का बीड़ा उठा लिया जो सड़क हादसे का शिकार होने के बाद मदद को तरस रहे होते हैं। इन लोगों को जैसे ही किसी हादसे की खबर मिलती है, सब कामकाज छोड़कर उन्हें बचाने दौड़ पड़ते हैं। यही नहीं, इन युवाओं ने एक एंबुलेंस सेवा भी शुरु की है। दरअसल कुछ साल पहले जब ये सब दोस्त कहीं कार से जा रहे थे। लेकिन गाजियाबाद में हाइवे पर इनकी कार का एक्सीडेंट हो गया। दुर्घटना में इनका दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गया। खुद भी ख़ून से लथपथ ये लोग हाइवे पर जा रही गाड़ियों से मदद मांगते रहे... ये लोग गिड़गिड़ाते रहे। लेकिन किसी ने भी रुककर इनकी मदद करने की ज़रूरत नहीं समझी। लगभग डेढ घंटे तक ये लोग बेबस होकर बिलखते रहे...। आखिरकार इनके दोस्त ने दम तोड़ दिया...। बस, वो दिन और उसके बाद से ये लोग नोएडा और आसपास हादसों में घायल होने वाले लोगों की मदद करते आ रहे हैं। इन युवाओं ने एक स्वयंसेवी समूह बनाया है जो बिना किसी सरकारी सहायता के अपना काम कर रहा है। अब तक ये लोग कई लोगों की जान बचा चुके हैं।

बिना किसी लालच के इस तरह के नेक काम में जुटे इन युवकों की पवित्र भावना सम्माननीय है। आज सुबह मेरे एक मित्र में मुझे इनके बारे में पता चला तो मैं बहुत प्रभावित हुआ। अभी मुझे उनके ग्रुप के बारे में ज्यादा तो पता नहीं लेकिन उनका फोन नंबर मालूम है-9899577999. वैसे तो हमारा कर्तव्य बनता है कि कोई भी हादसा होने पर हम मदद के लिए आगे आएं। लेकिन अगर किसी कारणवश ऐसा कर न सकें तो कम से कम 102 या ऊपर दिए नंबर कॉल तो कर सकते हैं...। ज्यादा नहीं तो इतनी जिम्मेदारी निभाकर भी थोड़ा पुण्य कमाया जा सकता है।
5 Responses
  1. kuchh log hai aise jinhone abhi tak is dharti ko marne se bacha rakha hai... acchi jaankari... no ab mere contacts mein save ho chuka hai...


  2. बहुत अच्छा है। हमें भी उन लोगों हर संभव मदद करनी चाहिये लेकिन ये तो सच है कि आजकल मानवता खत्म हो गयी है


  3. उन लोगों के बारे में थोड़ी और जानकारी जुटाइए राहुल। अपने स्तर पर उनकी थोड़ी मदद की जा सकती है।


  4. ऐसे लोगों और उनके कामों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.....


  5. आपकेvechaaar pade ur idea is good,u r new in journalism keep it up.

    Sunita Sharma