Aadarsh Rathore
टूटता था हर बार
टूटते वादे के साथ,
और जु़ड़ भी जाता था कमबख्त,
नए वादे के साथ...
दोस्ती सी हो गई थी
झूठे वादों के साथ,
करता था यकीन उनपर
नेक इरादों के साथ।

जिंदगी की राह में
इक नया ठौर आया,
वादे सब पीछे छूटे
दावों का दौर आया,
सीने में उठता दर्द
है जान लेने पर आमादा,
खोखले दावों से तो बेहतर था
वो झूठा, मगर मीठा वादा...
12 Responses
  1. Sajjad Says:

    तेरे वादों मे तुझसी कुछ नज़ाकत सी दिख रही है
    हैं रु-ब-रु मुझसे, मगर खिलाफत सी दिख रही है
    था मुझे गुमा कज़ा तक तेरे साथ होने का
    पर आगाज़-ए-मुहबत मे ही तेरी बग़ावत सी दिख रही है
    दिल ही बहल जाता, गर तू कर देती एक झूठा मगर मीठा वादा.

    जनाब बहुत खूब कहा आपने…..कभी कभी मैं भी लिख लिया करता हूँ….आप ऐसी नॅज़्मो को बराबर नज़र किया कीजिए…..


  2. M VERMA Says:

    खोखले दावों से तो बेहतर था
    वो झूठा, मगर मीठा वादा...
    bahut khoob sundar hai


  3. खोखले दावों से तो बेहतर था
    वो झूठा, मगर मीठा वादा...
    ehasso ki khubsoorti hai isame....atisundar


  4. भावों को कितनी खूबसूरती से शब्द दिए जा सकते हैं ये आपकी रचना पढ़कर पता चला ….बहुत ही सुंदर लिखा है आदर्श जी आपने


  5. Raj Says:

    ROCK ON BRO....

    Rock on hai ye pyala sabse pyara
    Rock on sare blogon se nyara....

    nice poem bro....


  6. सही कहा है किसी ने कि इश्क आदमी को शायर बना देता है, कवि बना देता है। कहीं इन लाइनों के पीछे भी वही बात तो नहीं



  7. bahut khoob likha hai aapne ...sach methi rachna


  8. बहुत उम्दा भावों की अभिव्यक्ति!!


  9. अच्छा लिखा है


  10. har jhoota magar meetha wada kai khokhle daavo se behtar hai...

    meethi kavita... man mitha ho gaya...


  11. आदर्श जी कहा खूब कहा है तेरा झूठा मगर मीठा वादा..वाकई में एक बेहतर रचना लिखी है आपने..बस ऐसे ही लिखते रहिए