Aadarsh Rathore
बिहार की जनता को सालों तक उल्लू बनाने वाले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पगला गए हैं। एक तरफ कहते हैं कि यूपीए का हिस्सा बने रहेंगे और फिर दरभंगा में हुई चुनावी रैली में कहते हैं कि बाबरी मस्जिद गिरने के लिए बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस भी बराबर की दोषी है। और तो और लालू ने रैली के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए एक ऐसी टिप्पणी कर दी जिसे किसी भी भाषा में शालीन नहीं कहा जा सकता। उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी को 'हराम...' की गाली दे दी।

दरअसल अल्पसंख्यकों को गोली देकर सत्ता में आने में माहिर लालू
इस बार अल्पसंख्यक वोटों को बिखराव से बौखला गए हैं। उन्हें लगा कि मुस्लिम वट कुछ हद तक कांग्रेस और जेडीयू-बीजेपी गठबंधन को भी गए हैं। यही वजह है कि अब बचे खुचे वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए लालू इस तरह के बयान दे रहे हैं। दरअसल उत्तरी बिहार के दरभंगा और उसके पड़ोसी जिले मधुबनी में मुस्लिम वर्ग के वोटरों की खासी तादाद है। वहां पर अपना प्रभाव जमाने के चक्कर में उन्होंने इस तरह की टिप्पणी कर दी। लालू ने इससे पहले भी एक चुनावी सभा में वरुण गांधी पर बुल्डोजर चलवाने की बात कही थी। ऐसा कहने के लिए उनपर पहले ही एक मामला दर्ज किया गया है। यहीं नहीं, बिहार के सबसे मौकापरस्त नेता (?) राम विलास पासवान ने भी लालू का समर्थन देते हुए कहते हैं कि बाबरी मस्जिद गिराने के लिए कांग्रेस भी बराबर दोषी है। लालू-पासवान दोनों ही अल्पसंख्यकों को बरगलाते रहे हैं। उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए ये लोग आज से नहीं बल्कि कई सालों से अनाप-शनाप बयान देते रहे हैं। सिमी के पक्ष में बयान देने वाले भी यही लोग हैं।

दरअसल लालू इस बार निष्पक्ष चुनाव होने को पचा नहीं पा रहे। लालू कोई करिश्मा करने में विफल रहे हैं। वो हर बात कहते थे कि पेटी खुलेगी तो उसमें से जिन्न निकलेगा। लालू गुण्डई ये लोगों में भय का माहौल बनाकर और बूथ कैप्चरिंग से हर बार फायदा उठाते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से चुनाव आयोग की सक्रियता ने उनके पर काट दिए हैं। ऊपर से दुनिया भर के पत्रकार बिहार में इलेक्शन कवर करने आए हैं। ऐसे में धांधली करना आसान नहीं। लालू को पता है कि इस बार उनका पत्ता साफ होने जा रहा है। इसलिए इस बार ईवीएम से न तो जिन्न निकल रहा है और न ही लालू को जीत मिल रही है। बस सोच रहे हैं कि जिन सीटों पर मतदान होना बाकी है, उनपर अल्पसंख्यकों, जो कि लालू की चाल को समझ चुके हैं और इस बार बेवकूफ नहीं बनना चाहते, को रिझाया जाए। इसके लिए लालू ने सारी मर्यादाएं लांघकर इस तरह की गाली दे दी है। बिहार को मटियामेट कर देने वाले इस विलेन से और कोई उम्मीद भी नहीं की जा सकती। करोड़ों रुपये का गबन करने वाले इस शख्स ने किया ही क्या है? लालू ने न तो बहुसंख्यकों के लिए कुछ किया है और नही अल्पसंख्यकों के लिए... किया है तो सिर्फ अपने परिवार के लिए... जनता को टीवी के माध्यम से सिर्फ सस्ता मनोरंजन दिया है और 'बिहारी' शब्द की गरिमा को गिराया है।
12 Responses
  1. नीरज श्रीवास्तव Says:

    अडवाणी कौन सा दुध का धुला है


  2. नीरज श्रीवास्तव Says:

    अडवाणी कौन सा दुध का धुला है


  3. PD Says:

    are, Advani ji kahiye.. Laloo ji kahiye.. Paswan ji kahiye.. ;)
    kam se kam itni to ijjat dijiye.. :)


  4. सत्ता जाते दिखता है तो कोई भी ऐसे है बौरा जायेगा न, भाई.


  5. PD ji, ye patrakar sabhi ko ek hi laathi se haankte hain, kabhi kisis ke aage shri ya ji nahi lagaate..... sahi bhi aur kuch mamlo me galat bhai


  6. ati sundar blog, narayan narayan


  7. कोई बौर्रा रहा है,कोई गुर्रा रहा है और कोई मिमिया रहा है. इलैक्सन खत्म होने तक यही तो देखने को मिलेगा.


  8. cmpershad Says:

    यह उनका दुर्भाग्य है कि लालूजी हंसना भूल गए हैं:)


  9. बि हट गया
    अब हारी है
    बनी लाचारी


    पहले बेचारा
    चारा हड़पा
    अब बिहारी
    हारी है।

    नेताओं की
    महिमा मां
    न्‍यारी है।


  10. अभी वोट का मामला है इस लिए आपस मे काटेगें भी,गुर्राएंगें भी,गलियाएंगें भी, लेकिन बाद में यही आपस में सत्ता पर काबिज़ होने के लिए आपस मे हाथ भी मिलाएगें। अभी तो इन्हें जनता को बेवकूफ बनाना हैं सो सब कुछ कर रहे हैं।


  11. सार्थक मुद्दे खो दिए हैं राजनीति ने। मधु लिमये जैसे प्रखर संसदविदों के ज़माने लद गए। संसद से लेकर जनता के दरवाज़े तक जूतम पैजार और उन्माद बांट रही है राजनीति। जनता भी उन्मादी है। जातिवादी है। जातिगत दड़बों से बाहर निकलकर जब बिहार की जनता ने मतदान किया तो नीतीश आए। अब समझदारी जनता को बरतनी है। लालू लगे रहेंगे भड़काने में। कुत्ता हड्डी नहीं छोड़ता चाहे दांत तुड़ा बैठे। लेख में काफी ऊपरी तौर पर लिखा आपने शोध के विषय को हवा में उड़ा दिया। कंजूसी कहूं या कुछ और? डाइल्यूशन और डाइवर्सन इन शब्दों के आसपास राजनीतिक भंवर बन रहा है। इन्हीं को लेकर विश्लेषण किया होता तो मज़ा आता लेख पढ़ने में।


  12. Surya Says:

    Laloo Jee unme se hain jo apne liye kuchh bhi kar sakte hain. Abhi kuchh dino pahle ek khabar aayee thi ki lallo ji ke ghar ko jo train jati hain use 10,000.00/day loss lagta hain ap soch lijiye