शून्य

एक लड़की है मान्यता. अमीर मां-बाप की इकलौती संतान। महलों में रहने वाली एक परी की तरह लगती है। मां-बाप ने उसकी हर ज़िद को पूरा किया। उम्र 21 साल के करीब है। उसकी सहेली थी...सौम्या नाम की। सौम्या एक ग़रीब परिवार से ताल्लुक रखती है लेकिन उनका आर्थिक स्तर उनकी दोस्ती के बीच कभी नहीं आया। एक शाम सौम्या और मान्यता कहीं जा रही थी। जैसे ही वो अंधेरी गली के पास पहुंची, एक बाइक सवार ने मान्यता के हाथ से उसका फोन खींच लिया। झपटमारों ने सौम्या के गले से सोने की माला भी खींच ली और फरार हो गए। इस वाररदात के बाद दोनों ने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई। थाना अध्यक्ष अदिति चौहान एक एक तेज़ तर्रार ऑफिर हैं। एक महिला होने के बावजूद इलाके के अपराधी उनके नाम से ही थर्राते हैं। अदिति ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामले की छानबीन करना शुरु कर दी। दो दिन के अंदर ही थानाध्यक्ष अदिति ने मामले का पर्दाफाश कर दिया। झपटमार गिरोह की मुखिया निकली एक लड़की, अर्पिता नाम की। अर्पिता बचपन से ही अभावों में पली बढ़ी थी। ऊंचे सपनों को पूरा करने की चाह में कब वह जुर्म की दुनिया में कूद गई उसे पता ही नहीं चला। जुर्म की दुनिया में अर्पिता अलग रसूख रखती है। केस चला, अर्पिता ने शहर की नामी वकील मोनिका की मदद ली। कोर्ट में मोनिका की दलीलों ने अभियोजन पक्ष के दावों की धज्जियां उड़ा दी। मोनिका आज तक कोई केस नहीं हारी। साल भर ही हुआ है उसे वकालत करते हुए लेकिन बड़े-बड़े दिग्गज उसके आगे पानी नहीं मांगते। इस पूरी घटना को किया नेहा ने। नेहा एक अग्रणी टीवी चैनल में रिपोर्टर है। उसके अंदाज़ और रिपोर्टिंग के अंदाज के कई मुरीद हैं। नेहा की छवि एक तेज़-तर्रार रिपोर्टर की है। ये सभी अलग-अलग प्रकृति और अलग-अलग परिवेश से सम्बन्ध रखती हैं। लेकिन इन सभी में एक समानता है। इन सभी के शयनकक्ष को आप खिलौनों से भरा पाएंगे। हालांकि सभी की उम्र 21 से 27 वर्ष के बीच है लेकिन फिर भी सभी को खिलौनों से बहद प्यार है। मात्र इन्ही की कहानी नहीं है, हर लड़की की यही कहानी है। हर लड़की बड़ी होने के बावजूद खिलौनों से अपने प्यार को क्यों नहीं छोड़ पातीं? खासकर सॉफ्ट टॉएज़ बचपन में लड़के भी तो खेलते हैं फिर क्यों वो बड़े होने पर खिलौनों के साथ नहीं खेलते?
आपका क्या मानना है?
(अपनी राय अगली पोस्ट में दूंगा, आप अपने विचार रखें)
6 Responses
  1. mehek Says:

    bahut hi dilchasp baat kahi.magar sau taka khari,aapko kaise malum sab ke paas soft toys hote hai?hamare paas 2 bade teddy hai:),kuch ladkiya apavad hoti hai,magar haa jyadatar ye soft toy prem khatam nahi hota.kyun ka jawab hamare paas nahi,bas pasand hai.


  2. आजकल की लडकियां ही जाने ... हमें तो पसंद नहीं थे।



  3. Amit Bhardwaj Says:

    मेरा मानना है कि क्योंकि लड़कियां नाजुक होती है तो शायद यहीं वजह है कि वो सॉफ्ट टॉयस पसंद करती है....


  4. Surya Says:

    kyonki hamare samaj mein larkiyon ko aaj bhi utni aajadi nahi hain jitni larko ko. aap dekhe to payenge jyadatar unhi ke paas hain soft toys hain jo family ke saath rahte hain.


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