Aadarsh Rathore
कहने को तो कन्या को देवी के रूप में पूजा जाता है लेकिन हकीकत यह है कि लोग घर की लक्ष्मी कही जाने वाली बेटियों को आज के दौर में भी कूड़े की तरह से घर से निकाल देते हैं। मामला भ्रूण हत्या से भी गंभीर है। संवेदनहीनता की इससे बड़ी हद और क्या हो सकती है जन्म देने के बाद इन्हें गंदे नाले और झाड़ियों तक में फैंक दिया जाता है। लखनऊ में इसी तरह का एक वाकया सामने आया है। पिछले एक महीने में यहां तीन लावारिस बच्चे मिले हैं। इनमें से दो नवजात हैं। खास बात ये कि तीनों ही लड़कियां हैं। चाइल्ड लाइन की निदेशक डॉ. संगीता का कहना है कि इन बच्चों में से एक को तो नाले में और दूसरी को कंटीली झाड़ियों से पाया गया था। इनमें से एक बच्ची के शरीर में कीड़े तक पड़ गए थे। इन बच्चों ने इस दुनिया में अपनी आंखें भी नहीं खोली थीं कि इनका सामना समाज के उस घिनौने चेहरे से हो गया जो पूरी मानवता को शर्मसार कर देता है। इन सभी ने जब इस दुनिया में कदम रखा था तो सबसे पहले अपनी मां का तलाशना चाहा होगा। इनकी चाह मां की उंगली थाम कर दुनिया जीतने की रही होगी। ये बच्चियां अपनी मां का प्यार तलाश रही हैं लेकिन इन्हें मालूम नहीं कि इनके बेरहम मां-बाप ने इन्हें लड़की होने की सज़ा दी है। इस तरह की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अकेले लखनऊ शहर की बात करें तो पिछले 10 महीनों में 16 लावारिस शिशु मिले हैं जिनमें से 14 लड़कियां ही हैं। चाइल्ड केयर लाइन लखनऊ की निदेशक डॉ. संगीता का कहना है कि इस तरह के मामले दिनों-दिन बढ़ते जा रहे हैं। अब तो आलम ये है कि इन अनाथ बच्चों की देखभाल के लिए बाल गृहों में केयरटेकर्स तक की कमी पड़ गई है। इस पूरी घटना से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि सभ्य कहलाए जाने वाले समाज की सोच कितनी बीमार है। वजह पुत्र लालसा रही हो या कुछ और। मुद्दा मैं यहां ये नहीं उठा रहा। जो बात दिल को कचोट रही है वो ये कि कोई कैसे अपनी संतान को इस तरह लावारिस छोड़ सकता है? या तो बच्चे पैदा न करो और अगर पैदा हो गए हैं और उनकी देखभाल नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें दरवाजे तक पहुंचा दिया जाए जहां उनकी परवरिश हो सके। नाली और झाड़ी में फैंकने का क्या मतलब?
शर्म आनी चाहिए हमें....
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8 Responses
  1. आकार Says:

    ये, तो बहुत बडा समाजिक समस्या है !


  2. आपने उचि‍त कहा, ये समस्‍या बहुत पुरानी है जो स्‍त्री के वि‍वाह और सामाजि‍क वि‍डम्‍बना पर र्नि‍भर करता है।


  3. jee haan samachar dekha tha..bahut dukh hua lekin kaise is samsya ko solve kiya jaye?

    janmanas ki soch mein parivartan ki jarurat hai-

    aap ke swagat ka tariqa bahut badiya hai---pahli baar kisi blog par aisa welcome message dekha--hindi blogs bhi high tech ho rahey hain--bahut khushi hui jaan kar--all the best.


  4. बहुत ही शरमनाक, हो सकत है इस मै कुछ केस ऎसे भी हो जिस मै बच्चा कुवारी लडकी के हुआ हो, लेकिन कुछ भी हो जब भी कोई केस पकडा जाये तो उसे जनता के समने फ़ांसी पर लटकाया जाये ताकि देखने वाले सबक ले, या फ़िर उस दोषी को, पत्थरो से मारा जाये.
    यह केसी मां??? जो दिल के टुकडे को एक दम से फ़ेंक रही है, ओर अपनी जिन्दगी को सुखी बनाने के लिये.....


  5. Rachna Singh Says:

    kabhie kabhie lagtaa haen ko hii kyun maan bannaa padtaa hean .kyun har galtee , kukarm kae baad kewal stri hii maan bantee haen ?? kyaa stri akaele maa bansaktii haen ? agar nahin to kyaa is ghinanae kaam kae liyae { navjaat bachho ko fakhnaa} kewal stri jimmedaar haen ??


  6. रचना जी,
    आपका कथन सही है कि अकेले मां दोषी नहीं है। लेकिन यहां पर मां पर सवाल उठाया जाना गलत नहीं है। यदि किसी स्त्री ने गर्भ धारण किया है तो दो संभावनाएं हो सकती हैं। या तो वह उसकी स्वैच्छिक संतान होगी या किसी भूल वश ऐसा हुआ होगा। यदि स्वेच्छा से गर्भ धारण करने के बाद वह मां अपनी संतान को छोड़ती है तब भी वह पाप कर रही है और अगर अनचाही संतान से छुटकारा पाने के लिए इस तरह का काम कर रही है तब भी दोषी है।
    इस तरह की घटनाओं में मां की गलती ज्यादा बढ़ जाती है। भले ही गर्भ ठहरने के लिए वह दोषी न हो, यह एक प्राकृतिक नियम है कि मां ही संतान को जन्म दे सकती है। लेकिन क्या गर्भवती हो जाने के बाद उसका खुद का कर्तव्य नहीं बनता कुछ?
    ये फैसला उसे ही करना है कि जिस संतान को वह नौ महीने अपनी प्राण शक्ति से पोषित कर रही है उसका भविष्य क्या होगा। उसे हर परिस्थिती का ध्यान रखना होगा। और अगर उससे बलप्रयोग कर उसकी संतान छीनी गई है तब भी उसे विद्रोह करना चाहिए। अनचाहा गर्भ ठहरने पर सामाज में बदनामी का डर लगता है तो सरकार ने गर्भपात के लिए कानून बना रखा है।
    लेकिन यहां समस्या ये नहीं है। यहां पर बात है कि लड़कियों को ही क्यूं छोड़ा गया। मानो या न मानो गांव की औरतें किसी के घर में कन्या का जन्म लेने पर शोक व्यक्त करते हुए सांत्वना देती हैं। पुत्र लालसा पुरुषों के बजाय महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है।
    यदि शास्त्रो में नारी को मातृत्व और असीम क्षमता का उल्लेख किया गया है तो वो झूठ नहीं है।
    एक नारी से सुह्रदय और पवित्र होने के नाते उम्मीदें बढ़ जाती हैं।