पिछले तीन साल से मैं उसे जब भी देखता हूँ तो वही आकर्षण नज़र आता था जो पहली बार देखने मे था...लेकिन चंद रोज़ से उसके चेहरे का नूर.......शायद वो भी मेकअप करने लगी है.
दो बहनें / बलराम अग्रवाल
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वे एक ही परिवार से निकली दो बहनें थीं। एक—गोल-मटोल और गोरी-चिट्टी;
दूसरी—चेहरे पर चेचक-जैसे दाग लिए चपटी और सूखी। दोनों को पाने वाले भी दो ही
तरह के लोग ...
अबकी बार खुले में शौच पर वार
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http://www.ichowk.in/humour/next-surgical-strike-will-be-on-open-defecation/story/1/5058.html
*'अबकी बार, खुले में शौच पर वार'*. सरकार का ये नया नारा उन ल...
ये दिल्ली है, ज़रा संभल कर
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(आप बीती)
ये आपबीती खास तौर पर उन लोगों के लिए जो दिल्ली और एनसीआर में रहने की वजह से
खुद को बिहार की तुलना में खुद ज्यादा महफूज महसूस करते हैं। (बिहार क...
बादल फटना- प्राकृतिक आपदा या कुछ और....
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उत्तराखंड में बादल फटने से आई आपदा ने मुझे सोचने पर मजबूर किया कि हर साल
बादल फटने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं। क्या ये सिर्फ प्रकृति का बदला हुआ
रूप है।...
यूपीएससी के रिजल्ट के अगले दिन मेरा दिन खराब...
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* सिविल सर्विसेज का जब भी रिजल्ट आता है...उस दिन मेरा दिन ख़राब हो जाता है.*..क्योंकि
सुबह-सुबह ही अख़बार वाले रिजल्ट फ्रंट पेज पर छाप देते हैं औऱ जैसे ही...
बदक़िस्मत होकर जाना, कितना खुशक़िस्मत था!
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*प्रभाष जी चले गए... अब भी हमें यकीन नहीं हो रहा। ग़मगीन हूं। मेरे एक दोस्त
तनसीम हैदर प्रभाष जी के पड़ोस में रहते हैं। उन्होंने प्रभाष जी के जाने को
जैसा ...
बहुत खूब भाई... सच्चाई जाहिर की है आपने इसे पढ़कर शायद अब लोग मेकअप ना करें
मुझे इन पंक्तियों पर आपत्ति है। आप सुन्दरता और कुरूपता के हिसाब से कैसे भेद कर सकते हैं। ये सब इंसान के वश की बात तो नहीं है। आपको कोई अधिकार नहीं।
आपकी खूबसूरत पोस्ट को ४-९-१० के चर्चा मंच पर सहेजा है.. आके देखेंगे क्या?
सटीक!
पिछले तीन साल से मैं उसे जब भी देखता हूँ तो वही आकर्षण नज़र आता था जो पहली बार देखने मे था...लेकिन चंद रोज़ से उसके चेहरे का नूर.......शायद वो भी मेकअप करने लगी है.