गोपाल सिंह नेगी
पिछले कुछ दिनों से बहुत आनंद में हूं, एक तरफ फुटबाल विश्व कप के मैचों के उलटफेर रोमांचित कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ़ दिल्ली मे मॉनसून की एक इंस्टॉलमेंट भी आ गयी है। हवाओं में आई ठंडक मुझे पहाड़ों की उन लड़कियों की याद दिला रही है जिनके साथ मैं इस तरह के मौसम मे घूमा करता था। कल शाम उन्हीं यादों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से मैं अपने तथाकथित घर की छत पर गया। हल्की-हल्की बारिश की बूंदे पड़ रही थी, दूर सड़क पर गाड़ियां अपेक्षाकृत कम गति से दौड़ रही थीं, सामने पार्क मे खड़े पेड़ अपने पतों की फड़फड़ाहट को लेकर एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे थे और इस पूरे नज़ारे को देखकर मैं विह्वल हुआ जा रहा था।

इस आनंदमय वातावारण कि निस्तब्धता को तोड़ते हुए अचानक एक आवाज़ गूंजी “You're a good soldier , Choosing your battles ....waka waka” ये मेरे मोबाइल की रिंगटोन है। उठाकर देखा तो एक परिचित का फ़ोन था जिनके साथ मैने एक डॉक्युमेंटरी बनाई थी। उन्होंने मौसम की तारीफ करते हुए मेरा कुशल क्षेम पूछा, औपचारिकतावश मैने भी पूछ लिया कि “भाई साहब आपका काम कैसा चल रहा है?” वो बोले की बहुत बाढ़िया चल रहा है, तनख्वाह भी बढ़ गयी है। फिर उन्होंने मेरे काम के बारे मे पूछा तो मैंने उन्हें कहा कि भाई कुछ ठीक नहीं चल रहा है, काम बहुत ज़्यादा है और उस हिसाब से तनख्वाह नहीं मिल रही हैँ। इसके बाद मैंने सबसे महत्वपूर्ण बात उनसे कही “भाई कहीं नौकरी का जुगाड़ करवा दो.” उन्होंने भी आशानुरूप उत्तर देते हुए कहा "ठीक है मैं कुछ देखता हूं"। थोड़ी और औपचारिकता भरी बातों के बाद फ़ोन रख दिया गया।

मैं पुन: बारिश की फुहारों का आनंद लेने लगा ही था कि शकीरा फिर से बोल पड़ी “...... Waka Waka ”। गांव से चाचा जी का फ़ोन था। उनका कॉल देखकर मुझे आश्चर्य हुआ क्योंकि करीब एक साल बाद उनका फ़ोन आया था। वो एक सरकारी विद्यालय में अध्यापक हैं। उन्होंने भी सबसे पहले मेरा हाल-चाल पूछा और मैंने भी रेडीमेड उत्तर दे दिया कि "चाचा जी सब ठीक है।" उसके बाद तो वो इस तरह से प्रश्न कर रहे थे मानो आज मेरी P.hd की अंतिम मौखिक परीक्षा हो। दिल्ली मे कहां रहते हो? ऑफिस कहां है? घर कहां है? कितने लोग रहते हैं? किराया कितना है? खाना कैसा है वगैरह-वगैरह ….. मैं भी एक आदर्श भतीजे का परिचय देते हुए पूरी सहनशीलता और शिष्टाचार से सारे प्रश्नों का सीधा उत्तर दे रहा था। जब मैंने उन्हें अपने कमरे का किराया बताया तो वो भौंचक्के रह गए “इतना महंगा कमरा मतलब कमाई भी तगड़ी है…अब ये बताओ गाड़ी कब ले रहे हो?” मैंने उनसे कहा “चाचा जी ऐसी बात नहीं है, दरअसल यहा महंगाई थोड़ी ज़्यादा है इसलिए कमरे भी महंगे हैं.” वो फिर बोल पड़े “यार हम तो 20,000 की सैलरी में मुश्किल से 1500 का कमरा लेकर गुज़ारा कर रहे हैं और तुम वहां पर 4000 का कमरा! तो तुम्हारी सॅलरी भी तो उतनी ही हुई ना?” इससे पहले कि मैं उन्हें स्पष्टीकरण देता वो बोल पड़े “अच्छा है बेटा इसी तरह तरक्की करते रहो, यहाँ पर काफ़ी लोग तुम्हारे बारे में बात करते हैं कि वो लड़का बड़ा काबिल निकला। मुझे ये सुनकर बहुत गर्व होता है तुझ पर।”

अब मेरे सारे विकल्प बंद हो चुके थे इसलिए बाकी औपचारिकताएं पूरी करते हुए मैंने उन्हे प्रणाम कहा और फ़ोन रख दिया। अब तक बारिश बंद हो चुकी थी, सड़क पर गाड़ियां उसी गति से दौड़ रही थीं। पार्क के पेड़ों की अटखेलियों के बीच चाचा जी का गर्व मेरी नौकरी के जुगाड़ के प्रयासों को और बल दे रहा था। इस समय मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो शकीरा मेरे सामने खड़ी हो और कह रही हो “You're a good soldier , Choosing your battles ....waka waka”
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8 Responses
  1. The pressure is on
    You feel it
    But you've got it all
    Believe it

    When you fall get up
    Oh oh...
    And if you fall get up
    Oh oh...

    हार न मानो, रार ना ठानो
    क्योंकि ये है इंडिया....


  2. The pressure is on
    You feel it
    But you've got it all
    Believe it

    When you fall get up
    Oh oh...
    And if you fall get up
    Oh oh...

    हार न मानो, रार न ठानो
    Cuz this is India


  3. आदर्श राठौर Says:

    The pressure is on
    You feel it
    But you've got it all
    Believe it

    When you fall get up
    Oh oh...
    And if you fall get up
    Oh oh...

    हार न मानो, रार न ठानो
    Cuz this is इंडिया


  4. बारिश का आनंद छत पर लिया जा रहा है .........बहुत खूब . .......अच्छा लगा पढ़ कर .


  5. आदि Says:
    This comment has been removed by the author.

  6. आदि Says:

    tumne un dino ki yaad dila di yar jab nov-dec ke un dino mein school se hum biling ya beach camp jaya karte the khair chodo ab to barf hi nahi padti to jana kya par kya din the yar wo bhi aaaj bhi yad karte hai to itna aanad milta hai ki pucho mat...........?


  7. गोपाल भाई सही है
    यादों में जो मजा होता है शायद वो सामने मिलने पर न आये....मौज लो


  8. Rahul Says:

    सही कहते हो बारिश मैं भीगने का आनद तो आता ही है और उसके साथ कोई अछि बात याद आये तो क्या बात

    वैसे लाइफ तो एक जंग है जिसमे कोई योधा ही जीत सकता है