Aadarsh Rathore
इक लड़की है जिसकी तरफ मैं अनायास ही आकर्षित होता जा रहा हूं। पता नहीं ये किस तरह का आकर्षण है, लेकिन इस अनुभूति के कारण अच्छा लग रहा है। मन में बहुत कुछ है उसके बारे में कहने को। मन करता है कि कविता लिख दूं। लेकिन कब से बैठा हूं और अब तक कुछ नहीं लिख पाया...। कविता का शीर्षक भी दिया था लेकिन एक घंटा हो गया, बार-बार कुछ लिख रहा हूं और पन्ने फाड़कर फेंक रहा हूं। समझ नहीं आ रहा है कि शुरू कहां से करूं। एक अलग तरह के रोमांच से भरा पड़ा हूं। उसके सामने जाता हूं तो एक अलग तरह का डर सा लगता है। मैं सबसे स्वतंत्र होकर बात करता हूं लेकिन उसी से बात नहीं कर पाता। बहुत मन करता है कि उसे कम से कम Hi कह दूं लेकिन लेकिन मैं Hi कहने में सहजता महसूस नहीं करता। वजह ये कि मैंने कभी इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। और करता भी होता तो शायद तब भी कहने की हिम्मत नहीं होती। मैं उसे जब भी देखता हूं, झुरझुरी सी दौ़ड़ जाती है। उसे देखते रहने का मन करता है। इसीलिए बार-बार छिपछिपकर उसे देखने की कोशिश करता रहता हूं। सुन्दरता क्या होती है, अगर किसी को जानना है तो उससे मिल ले। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसे हर लड़की अपनाना चाहे और हर लड़का अपना बनाना चाहे। कुछ समझ नहीं आ रहा है कि कैसे मैं बताऊं... लेकिन वो वाकई सबसे अलग है......
मैं बताना चाहता हूं कि वो कैसी है लेकिन कर नहीं पा रहा.....। मेरे साथ ऐसा पहली बार हुआ है जब मै खुद को इस तरह से लाचार पा रहा हूं। मन में सब साफ है लेकिन अभिव्यक्त नहीं कर पा रहा.........जब मैं खुद ही ये नहीं लिख पा रहा कि उसके बारे में क्या सोचता हूं तो भला उसके सामने क्या खाक कर पाऊंगा?
समस्या ये भी है कि मैं चलचित हूं। किसी भी भाव में ज्यादा समय तक नहीं रह पाता। इसलिए मैं उसके सामने अभिव्यक्त भी नहीं करना चाहता क्योंकि मुझे खुद पर भरोसा नहीं। लेकिन हां, मैं इस अनुभूति को जारी रखना चाहता हूं। एकतरफा चाहत में भी अलग सा आनन्द होता है। खुद को झूठमूठ में विकट परिस्थितियों में होने की कल्पना करना, उससे बिछड़ने के ख्वाब लेकर दुखी होना, इस तरह की कल्पनाएं करने में बहुत अलग अनुभूति होती है। इसलिए मैं इस अलग से भाव में ही जीना चाह रहा हूं। और तब तक ऐसा चाहता रहूंगा जब तक मन इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले लेता...

(डायरी के पन्नों से)
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12 Responses
  1. बच्चू गया काम से.... कोई अंतिम इच्छा हो तो अभी बता दो.
    थोडे दिनो मै तुम्हारी उदास कविताये आयेगी, फ़िर शेरो शायरी भी हम सब को झेलनी होगी, अगर लडकी के दो चार भाई है तो.....
    अच्छा भाई कल तक सब ठीक रहा तो मिलेगे,
    अरे हां कल के लेख मे जरुर लिखना आसमान मे कितने तारे गिने?? :)


  2. अरे अपनी बात उसे कविता में ही कह डालो किसी बहाने |


  3. jalim ke dekhane ke andaj to dekhana, wo dekhate hai jab jab koi dekhata naa ho. narayan narayan


  4. भईया,
    फ़टाफ़ट कुछ कर डालो वरना पूरी जिन्दगी फ़ोसला के मेम्बर बन के रहोगे । क्या कहा फ़ोसला नहीं पता?
    Frustrated One Sided Lovers Association.

    बाकी अगर कहो तो गालिब, ज़ौक, मीर की कुछ गजलें भेज दें, दिल आशिकाना हो जायेगा :-)


  5. और,
    कविता मत लिखना....ये जो भी लोग कविता लिखने को कह रहे हैं तुम्हे चने के झाड पर चढा रहे हैं । बच के रहना :-)


  6. Manoshi Says:

    post से ज़्यादा comments पढ़ कर मज़ा आया..राज भाटिया जी...आप का कमेंट पढ़ कर तो हाँसी नहीं रुकी...


  7. इस मामले मे तो कोई मदद नही कर पाऊंगा लेकिन बात ज़म जाने के बाद जो प्राब्लम भाटिया जी ने बताये हैं उनसे निपटने मे अपनी मास्टरी है।दो सौ से ज्यादा प्रेम विवाह करवा चुके हैं,भले ही खुद एक भी नही कर पाये्।एक से बढ कर एक एड्वेंचरस लफ़ड़ो वाली शादिया करवाई है।ज़रुरत पड़े तो बताना अपनी पूरी टीम इस कम मे एक्स्पर्ट लोगो की।


  8. abhishek Says:

    kya bat hai yaar kya likha hai....waise wo kushnaseeb ladki hai kaun....waise ye to pata tha ki tum acche writer ho lekin itne acche writer ho ye nahi pata tha...waise pata nahi ye tumne apne baare mai sach likha ya jhoot par meri life abhi chal raha hai....


  9. Ankur Gupta Says:
    This comment has been removed by the author.

  10. Ankur Gupta Says:

    अरे भईया! बधाई हो! आपको प्यार हो गया है.


  11. how can you write a so cool blog,i am watting your new post in the future!


  12. superior Says:

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